Gullak Season 5 Review: नए चेहरे और नई कहानियों के साथ लौटा मिश्रा परिवार, क्या इस बार भी जीत पाएगा दिल?

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भारतीय वेब सीरीज की दुनिया में कुछ ऐसे शो हैं जो बड़े ट्विस्ट, भारी एक्शन या चौंकाने वाले सस्पेंस के बिना भी दर्शकों के दिलों में जगह बना लेते हैं। उन्हीं में से एक है Gullak Season 5 Review का यह नया अध्याय, जिसमें मिश्रा परिवार एक बार फिर अपनी रोजमर्रा की जिंदगी, छोटे-छोटे संघर्षों और मध्यमवर्गीय भावनाओं के साथ दर्शकों के बीच लौट आया है। इस बार घर में नया रंग-रोगन, नई तकनीक और कुछ नए किरदारों के साथ कई नई सीखें भी देखने को मिलती हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सीजन पहले की तरह दिल को छू पाता है या नहीं?


कहानी में आया नया मोड़, लेकिन वही पुराना अपनापन बरकरार

Gullak Season 5 Review की कहानी वहीं से आगे बढ़ती है जहां पिछला सीजन खत्म हुआ था। हालांकि इस बार मिश्रा परिवार के दोनों बेटे पहले से अधिक बड़े और जिम्मेदार नजर आते हैं। बड़ा बेटा अन्नू अब नौकरी की दुनिया, ऑफिस पॉलिटिक्स और अपने निजी रिश्तों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। वहीं छोटा बेटा अमन कॉलेज लाइफ में कदम रख चुका है और जल्दी पैसे कमाने की चाहत में परिवार को एक नई परेशानी में डाल देता है।

Gullak Season 5 story

दूसरी ओर संतोष मिश्रा और शांति मिश्रा की जिंदगी अब भी उन्हीं रोजमर्रा की चुनौतियों के इर्द-गिर्द घूमती है जिनसे देश का हर मध्यमवर्गीय परिवार गुजरता है। गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतें, होम लोन की किश्तें और घरेलू बहसें कहानी को वास्तविकता के और करीब ले जाती हैं।


सीजन की सबसे बड़ी ताकत है इसकी सादगी

Gullak Season 5 Review का सबसे मजबूत पक्ष इसकी सादगी और वास्तविकता है। यहां बड़े-बड़े ड्रामे नहीं हैं, बल्कि ऐसी छोटी-छोटी घटनाएं हैं जिनसे लगभग हर भारतीय परिवार जुड़ाव महसूस कर सकता है। मां का बच्चों को डांटना, घर के खर्चों की चिंता, स्कूटर खराब होने पर पिता की बेचैनी और खाने-पीने जैसी मामूली बातों पर होने वाली बहसें इस सीरीज को खास बनाती हैं।

यही वजह है कि यह शो किसी काल्पनिक दुनिया की कहानी नहीं लगता, बल्कि हमारे आसपास के घरों की झलक जैसा महसूस होता है।



कलाकारों ने फिर जीता दर्शकों का दिल

जमील खान और गीतांजलि कुलकर्णी ने एक बार फिर अपने शानदार अभिनय से सीरीज को मजबूत आधार दिया है। दोनों कलाकारों की परफॉर्मेंस इतनी स्वाभाविक लगती है कि कई दर्शकों को अपने माता-पिता की याद आ सकती है। उनके भाव, संवाद और आपसी नोकझोंक पूरी कहानी को जीवंत बना देते हैं।

इसके अलावा बित्तू की मां के किरदार में सुनीता राजवार इस बार काफी प्रभाव छोड़ती हैं। सोशल मीडिया रील्स, महिलाओं के ग्रुप और हर मामले में अपनी राय देने की आदत उन्हें सीजन के सबसे मनोरंजक किरदारों में शामिल कर देती है।


नए अन्नू भैया को स्वीकार करने में लग सकता है समय

Gullak Season 5 Review का सबसे बड़ा बदलाव अन्नू भैया के किरदार में नजर आता है। पिछले चार सीजन में दर्शकों के पसंदीदा रहे अभिनेता वैभव राज गुप्ता इस बार शो का हिस्सा नहीं हैं। उनकी जगह अनंत वी जोशी ने ली है।

हालांकि अनंत वी जोशी ने अपने अभिनय से किरदार के भावनात्मक पहलुओं को अच्छी तरह निभाने की कोशिश की है, लेकिन लंबे समय से जुड़े दर्शकों को शुरुआत में नए चेहरे को स्वीकार करने में थोड़ा समय लग समय लग सकता है। यही इस सीजन की सबसे चर्चित और मिश्रित प्रतिक्रियाएं पाने वाली बात भी है।


लंबी कहानी और सामाजिक संदेश कहीं-कहीं करते हैं धीमा

Gullak Season 5 review

इस बार सीरीज को पहले की तुलना में थोड़ा अधिक लंबा बनाया गया है। जहां पहले सीजन अपेक्षाकृत छोटे और तेज रफ्तार वाले होते थे, वहीं अब सात एपिसोड की कहानी कुछ जगहों पर खिंची हुई महसूस होती है। साथ ही सामाजिक मुद्दों और जागरूकता से जुड़े संदेशों को काफी प्रमुखता दी गई है।

हालांकि इन विषयों का उद्देश्य सकारात्मक है, लेकिन कुछ दर्शकों को लग सकता है कि इससे शो की हल्की-फुल्की और मनोरंजक शैली थोड़ी गंभीर हो गई है।


देखें या छोड़ दें?

अगर आप गालियों, हिंसा और अत्यधिक डार्क कंटेंट से अलग कुछ पारिवारिक और भावनात्मक देखना चाहते हैं, तो Gullak Season 5 Review के आधार पर यह सीजन एक अच्छा विकल्प माना जा सकता है। यह शो आपको हंसाता है, पुराने दिनों की याद दिलाता है और कई मौकों पर भावुक भी कर देता है।

भले ही इसमें कुछ कमियां हों और नए कलाकारों के साथ तालमेल बैठाने में थोड़ा समय लगे, लेकिन मिश्रा परिवार का अपनापन अब भी बरकरार है। यही कारण है कि यह सीरीज पूरे परिवार के साथ बैठकर देखने लायक मनोरंजन प्रदान करती है और वीकेंड के लिए एक सुकूनभरा विकल्प साबित हो सकती है।

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